CH Surendra Solanki

From Winsaa
Revision as of 05:43, 17 January 2026 by Vinitha (talk | contribs) (Vinitha moved page Draft:CH Surendra Solanki to CH Surendra Solanki)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)
Jump to navigation Jump to search

CH Surendra Solanki (born 22 December 1984), also known as Chaudhary Surendra Solanki, is an Indian social worker, agriculturalist, student activist, and political leader from Palam village in Delhi. He is the President (Pradhan) of Palam 360 Khap, a traditional socio-cultural body representing villages of the Palam region.

He is the son of Chaudhary Ram Karan Solanki and belongs to a family with a long legacy of Khap leadership. Surendra Solanki is known for his active role in social movements, rural development campaigns, and advocacy for village rights in Delhi.

प्रारंभिक जीवन

सुरेंद्र सोलंकी का जन्म 22 दिसंबर 1984 को पालम गांव, दिल्ली में हुआ। वे चौधरी राम करण सोलंकी के पुत्र हैं। उनका पालन-पोषण सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में हुआ, जहाँ से उन्हें सेवा, नेतृत्व और सामुदायिक जिम्मेदारी के मूल्य प्राप्त हुए।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

पालम 360 खाप की अगुवाई सोलंकी परिवार की कई पीढ़ियों से होती आ रही है।

  • चौधरी रिज़क राम (दादा) — 1975 से 2006 तक लगभग 30 वर्षों तक पालम 360 खाप के प्रधान
  • चौधरी राम करण सोलंकी (पिता) — 16 वर्षों तक पालम 360 खाप के प्रधान

अपने पिता के निधन के बाद सुरेंद्र सोलंकी को पालम 360 खाप का प्रधान नियुक्त किया गया।

सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन

सुरेंद्र सोलंकी बहुत कम उम्र से ही राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वे किसान, गांव और ग्रामीण अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं।

प्रमुख पद

  • प्रधान – पालम 360 खाप (2021–वर्तमान)
  • अध्यक्ष – सर्वखाप पालम 360

राजनीतिक यात्रा

  • 2015 – दक्षिण दिल्ली नगर निगम (SDMC) में मनोनीत पार्षद
  • 2018 – राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व कार्यकारी अध्यक्ष रहे किसान कांग्रेस
  • 2021 – पालम 360 खाप के प्रधान बने

आंदोलनों में भूमिका

पहलवान आंदोलन

सुरेंद्र सोलंकी पहलवान आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे और खिलाड़ियों के समर्थन में आवाज़ उठाई।

गांव-देहात बचाओ यात्रा

सितंबर 2023 से शुरू हुई गांव-देहात बचाओ यात्रा दिल्ली के इतिहास के सबसे बड़े ग्रामीण आंदोलनों में से एक मानी जाती है। इस आंदोलन के तहत:

  • दिल्ली के गांवों के विकास हेतु ₹1300 करोड़ की राशि स्वीकृत करवाई गई
  • 17 वर्षों से बंद म्यूटेशन प्रक्रिया को पुनः शुरू कराया गया
  • डी.डी.ए. से जुड़ी एनओसी व्यवस्था में सुधार किया गया
  • ग्राम सभा की भूमि को गांवों के विकास के लिए उपयोगी बनाया गया

इस आंदोलन के दौरान:

  • पीरागढ़ी में 10–20 हजार लोगों की पंचायत
  • जंतर-मंतर पर पंचायत
  • एलजी और मुख्यमंत्री आवास पर कई पंचायतें
  • 22 दिसंबर 2024 को मंगोलपुरी कलां में दिल्ली की अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत आयोजित की गई

विचारधारा

सुरेंद्र सोलंकी का मानना है कि गांव, किसान और देहात दिल्ली की आत्मा हैं। वे पारंपरिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक आंदोलनों के माध्यम से गांवों के अधिकारों और विकास के लिए कार्य करते हैं।

सोशल मीडिया

संदर्भ