Poet Chaturbhuj: Difference between revisions

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==प्रारंभिक जीवन==
==प्रारंभिक जीवन==
कवि चतुर्भुज का जन्म हरियाणा के पलवल जिले के बनचारी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके जन्म की सटीक तिथि ज्ञात नहीं है, लेकिन अनुमानतः उनका जन्म 1867–68 के आसपास हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित बल्ला था। उनके परिवार में पंडित बल्ला और पंडित कुदेलाल दो भाई थे, जो परिवार की प्रमुख धुरी थे।
कवि चतुर्भुज का जन्म हरियाणा के पलवल जिले के बनचारी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके जन्म की सटीक तिथि ज्ञात नहीं है, लेकिन अनुमानतः उनका जन्म 1867–68 के आसपास हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित बल्ला था। उनके परिवार में पंडित बल्ला और पंडित कूड़ेलाल दो भाई थे, जो परिवार की प्रमुख धुरी थे।


बहुत कम आयु से ही कवि चतुर्भुज ने संगीत में असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया। लगभग 6 वर्ष की आयु में उन्होंने गायन और वाद्य यंत्रों का अभ्यास प्रारंभ किया। श्री दाऊ जी महाराज के मार्गदर्शन में उन्होंने 10–12 वर्ष की आयु तक गायन और वादन में विशेष दक्षता प्राप्त कर ली।
बहुत कम आयु से ही कवि चतुर्भुज ने संगीत में असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया। लगभग 6 वर्ष की आयु में उन्होंने गायन और वाद्य यंत्रों का अभ्यास प्रारंभ किया। श्री दाऊ जी महाराज के मार्गदर्शन में उन्होंने 10–12 वर्ष की आयु तक गायन और वादन में विशेष दक्षता प्राप्त कर ली।
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==व्यक्तिगत जीवन==
==व्यक्तिगत जीवन==
कवि चतुर्भुज के दो पुत्र थे – पंडित केवलराम और पंडित लेखराज, तथा तीन पुत्रियां थीं – पंडित जावित्री, पंडित सुखदेवी और पंडित राधेश्याम। उनकी मधुर और सुरीली आवाज ने उनकी लोकप्रियता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कवि चतुर्भुज के दो पुत्र थे – पंडित केवलराम और पंडित लेखराम। उनके परिवार में आगे की पीढ़ी में पंडित लेखराम के सुपुत्र थे – पंडित गोबिंदराम, पंडित भूपराम और पंडित राधेश्याम शास्त्री।
 
उनकी मधुर और सुरीली आवाज ने उनकी लोकप्रियता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


==अंतिम जीवन और निधन==
==अंतिम जीवन और निधन==
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लगभग 55–56 वर्ष की आयु में, 4 मार्च 1923 (चैत्र मास, प्रतिपदा, संवत 1980) को कवि चतुर्भुज का निधन हो गया।
लगभग 55–56 वर्ष की आयु में, 4 मार्च 1923 (चैत्र मास, प्रतिपदा, संवत 1980) को कवि चतुर्भुज का निधन हो गया।
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==विरासत==
==विरासत==
कवि चतुर्भुज को एक महान कवि और संगीतकार के रूप में स्मरण किया जाता है। उनके भक्तिमय भजन आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और उनकी विरासत भारतीय भक्ति संगीत में उनके अमूल्य योगदान के माध्यम से जीवित है।
कवि चतुर्भुज को एक महान कवि और संगीतकार के रूप में स्मरण किया जाता है। उनके भक्तिमय भजन आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और उनकी विरासत भारतीय भक्ति संगीत में उनके अमूल्य योगदान के माध्यम से जीवित है।